सम्वाददाता फारूक जाफरी की रिपोर्ट
भदोही। सीईपीसी के प्रशासनिक सदस्य एवं वरिष्ठ कालीन निर्यातक संजय गुप्ता ने हाल ही में अमेरिका द्वारा भारतीय वस्त्रों, विशेष रूप से हस्तनिर्मित कालीनों पर 26 प्रतिशत आयात शुल्क लगाए जाने के निर्णय को भारतीय कालीन उद्योग के लिए एक बड़ा झटका बताया है। उन्होंने कहा कि यह उद्योग पहले से ही कई आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है और इस नए आयात शुल्क से स्थिति और अधिक गंभीर हो जाएगी।
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| भारतीय कालीन उद्योग पर संकट, सरकार से राहत पैकेज की मांग |
कालीन उद्योग पर प्रभाव
भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग वैश्विक स्तर पर अपनी गुणवत्ता, डिजाइन और शिल्प कौशल के लिए प्रसिद्ध है। यह उद्योग न केवल देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है, बल्कि इससे जुड़े लगभग 20 लाख कारीगरों और श्रमिकों की जीविका का भी मुख्य साधन है। अमेरिका भारतीय कालीनों का सबसे बड़ा बाजार है, जहां लगभग 50% कालीनों का निर्यात किया जाता है।
अमेरिका द्वारा लगाए गए 26 प्रतिशत आयात शुल्क के कारण भारतीय कालीनों की कीमतों में वृद्धि होगी, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो जाएगी। इससे अमेरिकी खरीदारों के लिए ये कालीन महंगे हो जाएंगे और निर्यात में भारी गिरावट आ सकती है।
कारीगरों और उद्यमियों पर प्रभाव
इस आयात शुल्क का सबसे अधिक प्रभाव छोटे और मध्यम उद्यमों पर पड़ेगा, जो पहले से ही विभिन्न प्रकार की वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। यदि इस समस्या का समाधान शीघ्र नहीं निकाला गया, तो इस उद्योग में बड़े पैमाने पर नौकरियों पर खतरा मंडराने लगेगा, जिससे लाखों परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी।
संजय गुप्ता ने कहा कि यह शुल्क न केवल निर्यातकों और निर्माताओं के लिए नुकसानदायक है, बल्कि इससे जुड़े कारीगरों और बुनकरों के लिए भी एक गंभीर समस्या उत्पन्न करेगा। पहले से ही नकदी संकट से जूझ रहे इस उद्योग में श्रमिकों को समय पर भुगतान करना कठिन हो जाएगा, जिससे उनका जीवनयापन मुश्किल हो सकता है।
सरकार से अपील
संजय गुप्ता ने भारत सरकार से अनुरोध किया है कि कालीन उद्योग को राहत देने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं। उन्होंने विशेष रूप से ब्याज अनुदान योजना को पुनः बहाल करने की मांग की है, ताकि निर्यातकों और निर्माताओं को नकदी संकट से बचाया जा सके।
ब्याज अनुदान पुनः लागू करने से छोटे और मध्यम उद्यमों को किफायती दरों पर ऋण मिल सकेगा, जिससे वे अपनी उत्पादन क्षमता बनाए रख सकें और श्रमिकों को समय पर भुगतान कर सकें। इसके अलावा, सरकार को अमेरिका के साथ राजनयिक स्तर पर बातचीत कर इस शुल्क में राहत दिलाने के प्रयास भी करने चाहिए।
भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग आज एक अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा है। अमेरिका द्वारा लगाए गए 26 प्रतिशत आयात शुल्क के कारण यह उद्योग गहरे आर्थिक संकट में फंस सकता है, जिससे लाखों कारीगरों की आजीविका प्रभावित होगी। ऐसे में सरकार से अनुरोध है कि वह इस संकट को गंभीरता से ले और ब्याज अनुदान योजना को फिर से लागू करे, जिससे उद्योग को आवश्यक वित्तीय सहायता मिल सके। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह ऐतिहासिक रूप से समृद्ध भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग अस्तित्व के संकट में आ सकता है।

