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ज्ञानपुर में सपा कार्यकर्ताओं का जोरदार प्रदर्शन: रामजी लाल सुमन पर हमले और धमकियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

सपा सांसद पर हमले का विरोध: ज्ञानपुर में कार्यकर्ताओं ने सौंपा ज्ञापन


  सम्वाददाता फारूक जाफरी की रिपोर्ट

 ज्ञानपुर, 1 मई 2025: समाजवादी पार्टी (सपा) के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को ज्ञानपुर में कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन सपा के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन पर हाल के दिनों में हुए हमलों और लगातार मिल रही धमकियों के विरोध में आयोजित किया गया। सपा कार्यकर्ताओं ने करणी सेना और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित एक ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने योगी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उत्तर प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए।



प्रदर्शन की पृष्ठभूमि 

सपा सांसद रामजी लाल सुमन पर हाल के महीनों में कई बार हमले हो चुके हैं। सबसे ताजा घटना 27 अप्रैल 2025 को अलीगढ़ में हुई, जब सुमन का काफिला आगरा से बुलंदशहर के सुनहेरा गांव जा रहा था। इस दौरान गभाना टोल प्लाजा के पास करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने उनके काफिले पर टायर और पत्थर फेंके, जिससे कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए और कुछ लोगों को गंभीर चोटें आईं। इसके अलावा, 26 मार्च 2025 को आगरा में सुमन के निजी आवास पर करणी सेना ने तोड़फोड़ की थी और हिंसक प्रदर्शन किया था। सपा का आरोप है कि इन हमलों के बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे यह स्पष्ट होता है कि हमलावरों को सरकार का संरक्षण प्राप्त है।सपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये हमले सुमन के दलित समुदाय से होने और उनके द्वारा संसद में राणा सांगा को लेकर दिए गए एक विवादित बयान के कारण हो रहे हैं। सुमन ने संसद में कहा था कि राणा सांगा ने बाबर से सहयोग मांगा था, जिसे करणी सेना ने राजपूत समुदाय की भावनाओं का अपमान बताकर उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। हालांकि, सुमन ने बाद में स्पष्ट किया कि उनके बयान का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था और यह ऐतिहासिक संदर्भों पर आधारित था।

ज्ञानपुर में धरना और नारेबाजी 

ज्ञानपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित धरने में सपा के सैकड़ों कार्यकर्ता और नेता शामिल हुए। प्रदर्शन की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष प्रदीप यादव ने की। कार्यकर्ताओं ने "करणी सेना मुर्दाबाद", "योगी सरकार होश में आओ", और "दलित विरोधी सरकार नहीं चलेगी" जैसे नारे लगाए। प्रदर्शन के दौरान सपा नेताओं ने उत्तर प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था और सरकार की कथित दलित विरोधी नीतियों की कड़ी आलोचना की।जिलाध्यक्ष प्रदीप यादव ने कहा, "प्रदेश में जनता का उत्पीड़न, हत्या, लूट, और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं आम हो गई हैं। सरकार कानून व्यवस्था को बेहतर करने के बजाय अपराधियों को संरक्षण दे रही है। सपा सांसद रामजी लाल सुमन को करणी सेना लगातार धमकियां दे रही है और उनके काफिले पर हमला किया गया, लेकिन प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। यह स्पष्ट है कि हमलावरों को सरकार का खुला समर्थन प्राप्त है।"उन्होंने आगे कहा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव के नेतृत्व में पार्टी पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के सम्मान और स्वाभिमान की लड़ाई लड़ रही है, जिसे कमजोर करने के लिए भाजपा इस तरह के कदम उठा रही है। यादव ने चेतावनी दी कि अगर दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो सपा सड़क से लेकर संसद तक आंदोलन के लिए बाध्य होगी।

राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन 

प्रदर्शन के बाद सपा नेताओं ने जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में करणी सेना और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई। साथ ही, सपा सांसद की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने की अपील की गई। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि सांसद पर हमले और धमकियां न केवल एक जनप्रतिनिधि पर हमला हैं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र पर भी प्रहार हैं।

सपा नेताओं की प्रतिक्रिया

धरने में शामिल पूर्व मंत्री रामकिशोर बिंद ने कहा, "सपा सांसद पर हमला दलित समाज की आवाज को दबाने की साजिश है। करणी सेना के गुंडों को भाजपा का समर्थन प्राप्त है, तभी वे इतनी हिम्मत दिखा रहे हैं।"सपा नेता शोभनाथ यादव ने कहा, "जब एक सांसद सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता की क्या स्थिति होगी? योगी सरकार ने प्रदेश को जंगलराज में बदल दिया है।"महिला नेता श्यामला सरोज ने भी सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि महिलाओं और दलितों के खिलाफ बढ़ते अत्याचारों के लिए सरकार जिम्मेदार है।

प्रदेशव्यापी प्रदर्शन का हिस्सा

ज्ञानपुर में आयोजित यह धरना सपा के प्रदेशव्यापी प्रदर्शन का हिस्सा था। सपा ने 1 मई को उत्तर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन का आह्वान किया था। आगरा, लखीमपुर खीरी, शाहजहांपुर, पीलीभीत, मैनपुरी, बाराबंकी, प्रयागराज, वाराणसी, और मऊ जैसे जिलों में भी सपा कार्यकर्ताओं ने इसी मुद्दे पर प्रदर्शन किए और राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपे। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इन प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार की निष्क्रियता और हमलावरों को संरक्षण देना लोकतंत्र के लिए खतरा है।

क्या है करणी सेना का रुख?

करणी सेना ने सांसद सुमन के राणा सांगा पर दिए गए बयान को राजपूत समुदाय का अपमान बताया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष दुर्गेश सिंह ने अलीगढ़ में हुए हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा था कि जब तक सुमन अपने बयान के लिए माफी नहीं मांगते, इस तरह के विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे। हालांकि, सपा का कहना है कि यह हमला केवल बयान का विरोध नहीं, बल्कि सुमन के दलित होने और उनकी मुखर आवाज को दबाने की साजिश है।

आगे की रणनीति

सपा नेताओं ने स्पष्ट किया कि अगर सरकार ने जल्द ही हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो पार्टी बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करेगी। जिलाध्यक्ष प्रदीप यादव ने कहा, "हम शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन अगर सरकार ने हमारी मांगों को अनसुना किया, तो सपा कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे और संसद में भी यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया जाएगा।"

प्रदर्शन में शामिल प्रमुख नेता

धरने में ह्रदय नारायण प्रजापति, पूर्व मंत्री रामकिशोर बिंद, आरिफ सिद्दीकी, शोभनाथ यादव, विकास यादव, ओमप्रकाश यादव, श्यामला सरोज, राजेंद्र दुबे, सरिता बिंद, बिंदू सरोज, रामयज्ञ पाल, डॉ. नेबूलाल, प्रदीप वियोगी, दिलीप भीम कन्नौजिया, महेंद्र गौड़, धर्मेंद्र मिश्र सहित सपा के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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