ब्यूरो चीफ सरस सिंह।
भदोही। प्रधानमंत्री के आह्वान पर देशभर में चलाए जा रहे तिरंगा यात्रा एवं हर घर तिरंगा अभियान के तहत शुक्रवार को भदोही जनपद में दिव्यांगजनों ने अदम्य उत्साह और देशभक्ति की भावना के साथ भव्य तिरंगा यात्रा निकाली। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज और दिल में राष्ट्रप्रेम का जज्बा लिए दिव्यांगजन जब सड़क पर निकले तो लोगों ने उनका उत्साहवर्धन किया। यात्रा के दौरान भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारों से पूरा वातावरण देशभक्ति से ओत-प्रोत हो उठा।
तिरंगा यात्रा मतेथू तिराहे से प्रारंभ हुई और विभिन्न मार्गों से होते हुए अमर शहीद झूरी सिंह स्मारक स्थल, परऊपुर पहुंची, जहां यात्रा का समापन किया गया। दिव्यांगजनों ने अमर शहीद झूरी सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर शहीदों को नमन किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अमर शहीद झूरी सिंह के प्रपौत्र डॉ. रामेश्वर सिंह रहे। उन्होंने तिरंगा यात्रा में शामिल दिव्यांगजनों के जज्बे की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्र और शहीदों के प्रति सम्मान की भावना किसी शारीरिक क्षमता की मोहताज नहीं होती। दिव्यांगजनों ने जिस उत्साह और समर्पण के साथ तिरंगा यात्रा निकाली है, वह समाज के लिए प्रेरणादायी है।
डॉ. रामेश्वर सिंह ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जहां प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को अमर शहीदों के स्मारक स्थलों पर पहुंचकर उन्हें सम्मान देना चाहिए, वहीं कई बार इन स्थलों से दूरी बनाए रखी जाती है। इसके विपरीत दिव्यांगजन कठिनाइयों के बावजूद शहीदों के सम्मान में पूरे जज्बे के साथ यहां पहुंचे और राष्ट्रप्रेम की मिसाल पेश की। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों का यह प्रयास निश्चित रूप से तारीफ के काबिल है और युवा पीढ़ी को इससे देशभक्ति तथा राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों की प्रेरणा लेनी चाहिए।
यात्रा में शामिल लोगों ने कहा कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता, स्वतंत्रता और बलिदान का प्रतीक है। देश की आजादी के लिए शहीद हुए वीरों के बलिदान को याद करना और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
तिरंगा यात्रा के दौरान दिव्यांगजनों का उत्साह देखते ही बन रहा था। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उनके कदमों में जोश और चेहरे पर राष्ट्रप्रेम की चमक साफ दिखाई दे रही थी। यात्रा ने लोगों को यह संदेश दिया कि देशभक्ति के जज्बे के सामने शारीरिक सीमाएं भी छोटी पड़ जाती हैं। इस अवसर पर शिवकुमार सिंह, बाबू सलाम अंसारी, रविंद्र पाल, महेश कुमार, नीरज कनौजिया, प्रदीप कनौजिया, जितेंद्र कुमार, सूबेदार पाल, महावीर बिन्द, धर्मेंद्र बिन्द, दीनानाथ बिन्द, दिनेश बिन्द सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।





