सम्वाददाता फारूक जाफरी/ जिला भदोही
भदोही। अमेरिका द्वारा भारतीय कालीन निर्यात पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा से भदोही के कालीन उद्योग पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। इससे न केवल निर्यातकों में हड़कंप मचा है, बल्कि महिला व पुरुष बुनकरों और मजदूरों में भी गहरी निराशा और चिंता देखी जा रही है।
अमेरिका के 26% टैरिफ से भदोही के कालीन उद्योग पर संकट: आरिफ सिद्दीकी ने सरकार से राहत पैकेज की मांग की
समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव मोहम्मद आरिफ सिद्दीकी ने इस निर्णय को कालीन उद्योग के लिए घातक बताया है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि यदि कालीन निर्यात को बचाने के लिए 15 प्रतिशत ड्रा बैक और 10 प्रतिशत लाइसेंस शुल्क की घोषणा जल्द नहीं की गई, तो यह उद्योग बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएगा। इससे लाखों कालीन बुनकरों और मजदूरों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी।
विदेशी बाजार में घटती प्रतिस्पर्धा
आरिफ सिद्दीकी ने कहा कि पहले से ही वैश्विक बाजार में भारतीय कालीनों की प्रतिस्पर्धा कठिन हो रही थी। अब इस टैरिफ के कारण निर्यातकों को और अधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। विदेशी ग्राहक पहले से ही ऑर्डर देने में सतर्कता बरतते हैं, क्योंकि उनके लिए माल खरीदने की कोई गारंटी नहीं होती। इसके अलावा, कई बार निर्यातकों को अपनी दरें घटानी पड़ती हैं, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
कालीन उद्योग से जुड़े लाखों मजदूरों पर खतरा
कालीन उद्योग एक कुटीर उद्योग है, जिसमें 90 प्रतिशत मजदूर कार्यरत हैं। इसमें बुनाई, वूल रंगाई, डिजाइनिंग, स्टिचिंग और फिनिशिंग जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। एक कालीन तैयार करने में कम से कम 50 मजदूरों का योगदान होता है। पूरे भदोही कालीन बेल्ट में लाखों महिला और पुरुष बुनकर प्रतिदिन कालीन निर्माण में लगे रहते हैं।
आरिफ सिद्दीकी ने कहा कि भदोही का कालीन उद्योग देश-विदेश में अपनी पहचान बना चुका है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यदि सरकार जल्द ठोस कदम नहीं उठाती, तो इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी फैल सकती है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि जल्द से जल्द राहत पैकेज की घोषणा कर इस उद्योग को बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

