सम्वाददाता फारूक जाफरी की रिपोर्ट
भदोही। शहर में परिवहन विभाग और आरटीओ अधिकारियों द्वारा ई-रिक्शा चालकों के प्रति सख्त रवैया अपनाने से गरीब तबके के लोगों की रोजी-रोटी पर संकट गहरा गया है। इस मुद्दे को उठाते हुए पूर्व सभासद दानिश सिद्दीकी ने प्रशासन से गरीब जनमानस की चिंता करने की अपील की है।
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| चालान के डर से सड़क से हटे ई-रिक्शा, जिलाधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन - दानिश सिद्दिकी पूर्व सभासद |
सख्ती से बढ़ी मुश्किलें
इन दिनों भदोही नगर में ई-रिक्शा चालकों पर कुछ अधिक सख्ती बरती जा रही है। शासन के निर्देशानुसार ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है, जो उचित कदम है, लेकिन समस्या तब उत्पन्न हो रही है जब बिना पूर्व तैयारी के चालकों पर भारी चालान किए जा रहे हैं।
ई-रिक्शा चालक पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। यदि वे सड़क किनारे सवारी बैठाने या उतारने के लिए गाड़ी रोकते हैं, तो तुरंत उनका हजारों रुपये का चालान काट दिया जाता है। ऐसे में उनके सामने यह संकट खड़ा हो गया है कि वे चालान भरें या अपने परिवार का भरण-पोषण करें।
रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में आसानी की मांग
शहर में कई ई-रिक्शा चालक अब भय के कारण अपने वाहन घर पर खड़ा कर चुके हैं। वे चाहते हैं कि पहले रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाया जाए, ताकि वे बिना डर के अपना रोजगार जारी रख सकें। बहुत से लोगों ने ई-रिक्शा फाइनेंस करवाया है और सख्ती के कारण वे अपनी मासिक किश्त भी नहीं चुका पा रहे हैं।
अतिक्रमण हटाने की जरूरत
एक और बड़ी समस्या यह है कि शहर की सकरी सड़कों पर अतिक्रमण फैला हुआ है। रेलवे स्टेशन समेत कई स्थानों पर सड़क किनारे बनी दुकानों और ठेलों के कारण ई-रिक्शा चालकों के पास खड़े होने की जगह नहीं बचती। मजबूरी में जब वे सड़क किनारे रुकते हैं, तो उन पर चालान ठोक दिया जाता है। अगर प्रशासन अतिक्रमण हटाने की दिशा में काम करे, तो यह समस्या काफी हद तक हल हो सकती है।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपील
गरीब ई-रिक्शा चालकों की रोजी-रोटी बचाने के लिए सोमवार को जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान सैयद समीत अहमद, साबिर खान समेत कई लोग मौजूद रहे। ज्ञापन में मांग की गई कि प्रशासन तत्काल प्रभाव से इस समस्या का समाधान निकाले और ई-रिक्शा चालकों के लिए एक व्यवहारिक नीति लागू करे, जिससे वे निर्बाध रूप से अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें।

