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भदोही के औराई में 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर महिला सम्मान संगोष्ठी, सांसद सीमा द्विवेदी रहीं मुख्य अतिथि


एक राष्ट्र, एक चुनाव विषय पर औराई में महिला सम्मान संगोष्ठी आयोजित, सांसद सीमा द्विवेदी रहीं मुख्य अतिथि

  सम्वाददाता फारूक जाफरी की रिपोर्ट

भदोही, उत्तर प्रदेश।

एक राष्ट्र, एक चुनाव के समर्थन में मंगलवार को औराई विधानसभा के अंतर्गत स्थित ब्लॉक सभागार में महिला सम्मान समारोह एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा ने किया, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद बहन सीमा द्विवेदी मौजूद रहीं।

इस विशेष आयोजन का उद्देश्य महिलाओं को सम्मानित कर लोकतांत्रिक जागरूकता फैलाना और "एक राष्ट्र, एक चुनाव" की अवधारणा को जनमानस के बीच मजबूती से प्रस्तुत करना था। कार्यक्रम का संचालन स्नेह लता श्रीवास्तव द्वारा किया गया और जिले की संयोजिका रोली सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।


मुख्य अतिथि सीमा द्विवेदी ने अपने संबोधन में कहा कि मध्यावधि चुनावों के कारण देश पर आर्थिक और प्रशासनिक बोझ बढ़ता है। उन्होंने कहा कि अगर पूरे देश में एक साथ चुनाव होते हैं तो इससे सरकारी संसाधनों की बचत होगी और शासन व्यवस्था अधिक सशक्त बनेगी। उन्होंने औराई विधानसभा की महिलाओं की बड़ी भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि यह स्पष्ट संकेत है कि जनता अब जागरूक है और व्यवस्था में बदलाव चाहती है।

जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा ने मंच से घोषणा करते हुए कहा कि "भदोही से एक राष्ट्र, एक चुनाव" के पक्ष में जनसमर्थन की एक मजबूत आवाज उठेगी। उन्होंने यह भी विश्वास दिलाया कि यह अभियान केवल सरकार का नहीं, बल्कि जनपद के हर नागरिक का अभियान बनेगा।

कार्यक्रम के जिला समन्वयक गोवर्धन राय ने भी एक राष्ट्र, एक चुनाव की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि इससे न केवल प्रशासनिक सुगमता होगी, बल्कि जनता को भी बार-बार होने वाले चुनावों की परेशानी से मुक्ति मिलेगी।

इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख बृजमोहन मिश्रा औराई, प्रोफेसर सुचिता वर्मा, रीना सिंह, डॉ. आराधना वर्मा, डॉ. अनीता सरोज, प्रो. कृतिका, डॉ. प्रीति पाल, डॉ. नम्रता दुबे, डॉ. नीतू शुक्ला, आरती सिंह और लक्ष्मी बिना सहित सैकड़ों महिलाएं व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि व आयोजकों ने समस्त आगंतुकों का आभार व्यक्त करते हुए यह संदेश दिया कि लोकतांत्रिक सुधारों की दिशा में "एक राष्ट्र, एक चुनाव" एक निर्णायक कदम हो सकता है, जिसे जनभागीदारी से सफल बनाया जा सकता है।



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