भदोही, 4 मई 2025
मोदी सरकार द्वारा हाल ही में कैबिनेट मीटिंग में जाति आधारित जनगणना कराने के लिए मंजूरी दिए जाने के फैसले पर राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। इस फैसले को लेकर भदोही के वरिष्ठ कांग्रेस नेता मुशीर इक़बाल ने इसे "इंडिया गठबंधन और राहुल गांधी के संघर्ष की ऐतिहासिक जीत" बताया है।
मुशीर इक़बाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह फैसला सामाजिक न्याय के संघर्ष में एक अहम मील का पत्थर है। उन्होंने कहा, “जातिगत जनगणना की मांग कांग्रेस और विपक्ष वर्षों से कर रहे थे। राहुल गांधी ने सदन के भीतर और बाहर निरंतर यह मांग उठाई। आज भाजपा सरकार ने अंततः उस दबाव में यह फैसला लिया है, जो सामाजिक समानता के लिए बेहद जरूरी है।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा अब तक जातिगत जनगणना से बचती रही है क्योंकि इससे उसके कथित वर्चस्ववादी एजेंडे को चुनौती मिलती थी। “जातीय जनगणना से ही यह तय होगा कि कौन-सा वर्ग कितनी संख्या में है और उसे कितना प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। आज तक कुछ वर्गों ने जनसंख्या से अधिक सत्ता और संसाधनों पर कब्जा कर रखा है। यह अन्याय खत्म करने के लिए जातीय आंकड़े जरूरी हैं,” – मुशीर इक़बाल ने कहा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी "सबकी हिस्सेदारी, सबकी भागीदारी" की नीति पर विश्वास करती है। उनका कहना है कि देश का समावेशी विकास तभी संभव है जब सभी वर्गों और जातियों को उनकी आबादी के अनुपात में अधिकार और प्रतिनिधित्व मिले। यही लोकतंत्र की असली आत्मा है।
मुशीर इक़बाल ने कहा कि यह सिर्फ एक जनगणना नहीं है, बल्कि यह देश में सामाजिक संतुलन, आर्थिक न्याय और राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास है। उन्होंने इसे भारत की एकता और अखंडता को मजबूत करने वाला कदम बताया।
उन्होंने कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने मिलकर इस मुद्दे को जन-जन तक पहुँचाया और अंततः केंद्र सरकार को फैसले पर बाध्य किया।
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद, यह साफ है कि जातीय जनगणना अब सिर्फ आंकड़ों की प्रक्रिया नहीं रह गई है, बल्कि यह देश के सामाजिक ढांचे को संतुलित करने का आधार बन सकती है।
– भदोही से फारूक जाफरी की रिपोर्ट




