ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रयागराज पुलिस की प्रभावी पैरवी रंग लाई, अदालत ने 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
बहरिया/प्रयागराज। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा चलाए जा रहे 'ऑपरेशन कन्विक्शन' अभियान के तहत प्रयागराज कमिश्नरेट पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। वर्ष 2007 के हत्या के एक चर्चित मामले में न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी करार देते हुए कठोर आजीवन कारावास तथा 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला पुलिस की गुणवत्तापूर्ण विवेचना और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी का परिणाम माना जा रहा है।
पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश के निर्देशन में संचालित अभियान के अंतर्गत पुलिस आयुक्त एवं अपर पुलिस आयुक्त के मार्गदर्शन तथा पुलिस उपायुक्त गंगानगर और अपर पुलिस उपायुक्त गंगानगर के पर्यवेक्षण में थाना बहरिया पुलिस ने इस मुकदमे में साक्ष्यों को मजबूती से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के बाद विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट, कक्ष संख्या-02, प्रयागराज ने अपना फैसला सुनाते हुए अभियुक्त को दोषी ठहराया।
अदालत ने लालचन्द्र पटेल पुत्र स्वर्गीय कामता प्रसाद पटेल, निवासी शिवचरन का पूरा, थाना सोरांव, कमिश्नरेट प्रयागराज को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी मानते हुए कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही न्यायालय ने अभियुक्त पर 20,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में नियमानुसार अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
यह मामला थाना बहरिया में वर्ष 2007 में दर्ज मु0अ0सं0-164/2007, धारा 302/201 भारतीय दंड संहिता से संबंधित था। लंबे समय तक चले न्यायिक परीक्षण के दौरान पुलिस और अभियोजन पक्ष ने साक्ष्यों एवं गवाहों को प्रभावी ढंग से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर अभियुक्त का अपराध सिद्ध हो सका।
इस मुकदमे में एडीजीसी मनोज पाण्डेय, थानाध्यक्ष मानवेन्द्र कुमार सिंह, मुख्य आरक्षी रूबी सिंह (कोर्ट मोहर्रिर) तथा हेड कांस्टेबल सुभाष निषाद (पैरोकार, थाना बहरिया) ने प्रभावी पैरवी और समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रयागराज पुलिस ने बताया कि ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत गंभीर अपराधों में दर्ज मुकदमों की नियमित निगरानी की जा रही है। मजबूत विवेचना, साक्ष्यों के वैज्ञानिक संकलन और प्रभावी पैरवी के माध्यम से अपराधियों को शीघ्र एवं कड़ी सजा दिलाने का अभियान लगातार जारी है, जिससे कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।

